19 October, 2014

Shree Suktam


Shree Suktam (Sri Suktam) is a Sanskrit devotional hymn revering Shree as Goddess Lakshmi of wealth and prosperity. Shree Suktam is one of the best ways to worshipping of Goddess Lakshmi. Devotees who recite Shree Suktam daily never suffer from poverty.


ॐ हिर॑ण्यवर्णां॒ हरि॑णीं सु॒वर्ण॑रज॒तस्र॑जाम् ।
चंद्रां हि॒रण्म॑यीं ल॒क्ष्मीं जात॑वेदो म॒ आव॑ह ॥
तां म॒ आव॑ह॒ जात॑वेदो ल॒क्ष्मीमन॑पगा॒मिनी॓म् ।
यस्यां॒ हिर॑ण्यं वि॒देयं॒ गामश्वं॒ पुरु॑षान॒हम् ॥
अ॒श्व॒पू॒र्वां र॑थम॒ध्यां ह॒स्तिना॓द-प्र॒बोधि॑नीम् ।
श्रियं॑ दे॒वीमुप॑ह्वये॒ श्रीर्मा दे॒वीर्जु॑षताम् ॥
कां॒ सो॓स्मि॒तां हिर॑ण्यप्रा॒कारा॑मा॒र्द्रां ज्वलं॑तीं तृ॒प्तां त॒र्पयं॑तीम् ।
प॒द्मे॒ स्थि॒तां प॒द्मव॑र्णां॒ तामि॒होप॑ह्वये॒ श्रियम् ॥
चंद्रां प्र॑भा॒सां य॒शसा॒ ज्वलं॑तीं॒ श्रियं॑ लो॒के दे॒वजु॑ष्टामुदा॒राम् ।
तां प॒द्मिनी॑मीं॒ शर॑णम॒हं प्रप॑द्ये‌உल॒क्ष्मीर्मे॑ नश्यतां॒ त्वां वृ॑णे ॥
आ॒दि॒त्यव॑र्णे तप॒सो‌உधि॑जा॒तो वन॒स्पति॒स्तव॑ वृ॒क्षो‌थ बि॒ल्वः ।
तस्य॒ फला॑नि॒ तप॒सानु॑दंतु मा॒यांत॑रा॒याश्च॑ बा॒ह्या अ॑ल॒क्ष्मीः ॥
उपैतु॒ मां दे॒वस॒खः की॒र्तिश्च॒ मणि॑ना स॒ह ।
प्रा॒दु॒र्भू॒तो‌உस्मि॑ राष्ट्रे॒‌உस्मिन् की॒र्तिमृ॑द्धिं द॒दादु॑ मे ॥
क्षुत्पि॑पा॒साम॑लां ज्ये॒ष्ठाम॑ल॒क्षीं ना॑शया॒म्यहम् ।
अभू॑ति॒मस॑मृद्धिं॒ च सर्वां॒ निर्णु॑द मे॒ गृहात् ॥
ग॒ंध॒द्वा॒रां दु॑राध॒र्षां॒ नि॒त्यपु॑ष्टां करी॒षिणी॓म् ।
ई॒श्वरीग्ं॑ सर्व॑भूता॒नां॒ तामि॒होप॑ह्वये॒ श्रियम् ॥
मन॑सः॒ काम॒माकूतिं वा॒चः स॒त्यम॑शीमहि ।
प॒शू॒नां रू॒पमन्य॑स्य मयि॒ श्रीः श्र॑यतां॒ यशः॑ ॥
क॒र्दमे॑न प्र॑जाभू॒ता॒ म॒यि॒ संभ॑व क॒र्दम ।
श्रियं॑ वा॒सय॑ मे कु॒ले मा॒तरं॑ पद्म॒मालि॑नीम् ॥
आपः॑ सृ॒जंतु॑ स्नि॒ग्दा॒नि॒ चि॒क्ली॒त व॑स मे॒ गृहे ।
नि च॑ दे॒वीं मा॒तरं॒ श्रियं॑ वा॒सय॑ मे कु॒ले ॥
आ॒र्द्रां पु॒ष्करि॑णीं पु॒ष्टिं॒ सु॒व॒र्णाम् हे॑ममा॒लिनीम् ।
सू॒र्यां हि॒रण्म॑यीं ल॒क्ष्मीं जात॑वेदो म॒ आव॑ह ॥
आ॒र्द्रां यः॒ करि॑णीं य॒ष्टिं पि॒ंग॒लाम् प॑द्ममा॒लिनीम् ।
चंद्रां हि॒रण्म॑यीं ल॒क्ष्मीं॒ जात॑वेदो म॒ आव॑ह ॥
तां म॒ आव॑ह॒ जात॑वेदो ल॒क्षीमन॑पगा॒मिनी॓म् ।
यस्यां॒ हिर॑ण्यं॒ प्रभू॑तं॒ गावो॑ दा॒स्यो‌உश्वा॓न्, वि॒देयं॒ पुरु॑षान॒हम् ॥
ॐ म॒हा॒दे॒व्यै च॑ वि॒द्महे॑ विष्णुप॒त्नी च॑ धीमहि ।
तन्नो॑ लक्ष्मीः प्रचो॒दया॓त् ॥

श्री-र्वर्च॑स्व॒-मायु॑ष्य॒-मारो॓ग्य॒मावी॑धा॒त् पव॑मानं मही॒यते॓ ।
धा॒न्यं ध॒नं प॒शुं ब॒हुपु॑त्रला॒भं श॒तसं॓वत्स॒रं दी॒र्घमायुः॑ ॥


ॐ शांतिः॒ शांतिः॒ शांतिः॑ ॥

18 October, 2014

Shri Hanuman Chalisa with Meaning


श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित


श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन कुमार।
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार॥
सद्गुरु के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ कर, श्रीराम के दोषरहित यश का वर्णन करता हूँ जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चार फल देने वाला है। स्वयं को बुद्धिहीन जानते हुए, मैं पवनपुत्र श्रीहनुमान का स्मरण करता हूँ जो मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करेंगे और मेरे मन के दुखों का नाश करेंगे ।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥२॥
श्री हनुमान की जय हो जो ज्ञान और गुण के सागर हैं, तीनों लोकों में वानरों के ईश्वर के रूप में विद्यमान श्री हनुमान की जय हो॥ आप श्रीराम के दूत, अपरिमित शक्ति के धाम, श्री अंजनि के पुत्र और पवनपुत्र नाम से जाने जाते हैं ।

महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥४॥
आप महान वीर और बलवान हैं, वज्र के समान अंगों वाले, ख़राब बुद्धि दूर करके शुभ बुद्धि देने वाले हैं, आप स्वर्ण के समान रंग वाले, स्वच्छ और सुन्दर वेश वाले हैं, आपके कान में कुंडल शोभायमान हैं और आपके बाल घुंघराले हैं ।

हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥५॥
शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥६॥
आप हाथ में वज्र (गदा) और ध्वजा धारण करते हैं, आपके कंधे पर मूंज का जनेऊ शोभा देता है, आप श्रीशिव के अंश और श्रीकेसरी के पुत्र हैं, आपके महान तेज और प्रताप की सारा जगत वंदना करता है ।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लषन सीता मन बसिया॥८॥
आप विद्वान, गुणी और अत्यंत बुद्धिमान हैं, श्रीराम के कार्य करने के लिए सदैव उत्सुक रहते हैं, आप श्रीराम कथा सुनने के प्रेमी हैं और आप श्रीराम, श्रीसीताजी और श्रीलक्ष्मण के ह्रदय में बसते हैं ।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥१०॥
आप सूक्ष्म रूप में श्रीसीताजी के दर्शन करते हैं, भयंकर रूप लेकर लंका का दहन करते हैं, विशाल रूप लेकर राक्षसों का नाश करते हैं और श्रीरामजी के कार्य में सहयोग करते हैं ।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥११॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२॥
आपने संजीवनी बूटी लाकर श्रीलक्ष्मण की प्राण रक्षा की, श्रीराम आपको हर्ष से हृदय से लगाते हैं। श्रीराम आपकी बहुत प्रशंसा करते हैं और आपको श्रीभरत के समान अपना प्रिय भाई मानते हैं ।

सहस बदन तुम्हरो जस गावै।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥
आपका यश हजार मुखों से गाने योग्य है, ऐसा कहकर श्रीराम आपको गले से लगाते हैं। श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारदजी, सरस्वती, शेषनाग सब आपका गुण गान करते है ।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राजपद दीन्हा॥१६॥
यम, कुबेर आदि दिग्पाल भी आपके यश का वर्णन नहीं कर सकते हैं, फिर कवि और विद्वान कैसे उसका वर्णन कर सकते हैं। आपने सुग्रीव का उपकार करते हुए उनको श्रीराम से मिलवाया जिससे उनको राज्य प्राप्त हुआ ।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥१७॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥१८॥
आपकी युक्ति विभीषण माना और उसने लंका का राज्य प्राप्त किया, यह सब संसार जानता है। आप सहस्त्र योजन दूर स्थित सूर्य को मीठा फल समझ कर खा लेते हैं ।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥
प्रभु श्रीराम की अंगूठी को मुख में रखकर आपने समुद्र को लाँघ लिया, आपके लिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है। इस संसार के सारे कठिन कार्य आपकी कृपा से आसान हो जाते हैं ।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डरना॥२२॥
श्रीराम तक पहुँचने के द्वार की आप सुरक्षा करते हैं, आपके आदेश के बिना वहाँ प्रवेश नहीं होता है, आपकी शरण में सब सुख सुलभ हैं, जब आप रक्षक हैं तब किससे डरने की जरुरत है ।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥२३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥२४॥
अपने तेज को आप ही सँभाल सकते हैं, तीनों लोक आपकी ललकार से काँपते हैं। केवल आपका नाम सुनकर ही भूत और पिशाच पास नहीं आते हैं ।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
संकट तें हनुमान छुडावैं।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥२६॥
महावीर श्री हनुमान जी का निरंतर नाम जप करने से रोगों का नाश होता है और वे सारी पीड़ा को नष्ट कर देते हैं। जो श्री हनुमान जी का मन, कर्म और वचन से स्मरण करता है, वे उसकी सभी संकटों से रक्षा करते हैं ।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥२८॥
सबसे पर, श्रीराम तपस्वी राजा हैं, आप उनके सभी कार्य बना देते हैं। उनसे कोई भी इच्छा रखने वाले, सभी लोग अनंत जीवन का फल प्राप्त करते हैं ।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥
आपका प्रताप चारों युगों में विद्यमान रहता है, आपका प्रकाश सारे जगत में प्रसिद्ध है। आप साधु- संतों की रक्षा करने वाले, असुरों का विनाश करने वाले और श्रीराम के प्रिय हैं ।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
आप आठ सिद्धि और नौ निधियों के देने वाले हैं, आपको ऐसा वरदान माता सीताजी ने दिया है। आपके पास श्रीराम नाम का रसायन है, आप सदा श्रीराम के सेवक बने रहें ।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि – भक्त कहाई॥३४॥
आपके स्मरण से जन्म- जन्मान्तर के दुःख भूल कर भक्त श्रीराम को प्राप्त करता है और अंतिम समय में श्रीराम धाम (वैकुण्ठ) में जाता है और वहाँ जन्म लेकर हरि का भक्त कहलाता है ।

और देवता चित न धरई।
हनुमत से हि सर्व सुख करई॥३५॥
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥
दूसरे देवताओं को मन में न रखते हुए, श्री हनुमान से ही सभी सुखों की प्राप्ति हो जाती है। जो महावीर श्रीहनुमान जी का नाम स्मरण करता है, उसके संकटों का नाश हो जाता है और सारी पीड़ा ख़त्म हो जाती है ।

जै जै जै हनुमान गोसाई।
कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥
भक्तों की रक्षा करने वाले श्री हनुमान की जय हो, जय हो, जय हो, आप मुझ पर गुरु की तरह कृपा करें। जो कोई इसका सौ बार पाठ करता है वह जन्म-मृत्यु के बंधन से छूटकर महासुख को प्राप्त करता है ।

जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ ह्रदय महँ डेरा॥४०॥
जो इस श्री हनुमान चालीसा को पढ़ता है उसको सिद्धि प्राप्त होती है, इसके साक्षी भगवान शंकर है । श्री तुलसीदास जी कहते हैं, मैं सदा श्रीराम का सेवक हूँ, हे स्वामी! आप मेरे हृदय में निवास कीजिये ।

10 October, 2014

Diwali Muhurat - Year 2014


Pushya Nakshtra :
Purchase Account Books, Gold, Silver
(1) Date: 16 Oct. 2014, Thursday, Aswin Krishna Paksh 8
Best Time - Guru Pushya Yoga : (IST)
(Pushya Nakshatra Starts at 10:47 am)
12:26 pm to 03:19 pm
04:46 pm to 07:46 pm

(2) Date: 17 Oct. 2014, Friday, Aswin Krishna Paksh 9
Best Time : (IST)
08:05 am to 10:59 am
12:25 pm to 01:37 pm
(Pushya Nakshatra Ends at 1:37 pm)

Dhan Teras :
Perform Lakshmi / Kuber / Dhanvantari Pujan
Date: 21 Oct. 2014, Tuesday, Aswin Krishna Paksh 13
Best Time : (IST)
10:59 am to 01:51 pm
03:17 pm to 04:43 pm
07:43 pm to 09:17 pm
10:51 pm to 01:13 am
(Dhan Teras Ends at 1:13 am)

Kaali Chaudas :
Perform Grah Jap, Bhairav and Hanuman Puja
Date: 22 Oct. 2014, Wednesday, Aswin Krishna Paksh 14
Best Time : (IST)
06:41 am to 09:33 am
10:59 am to 12:24 pm
04:42 pm to 06:08 pm
07:42 pm to 10:50 pm

Diwali (Deepavali) :
Perform Lakshmi / Sharda Pujan / Chopda Pujan
Date: 23 Oct. 2014, Thursday, Aswin Krishna Amavasya
Best Time : (IST)
06:41 am to 08:07 am
12:24 pm to 03:16 pm
04:42 pm to 09:16 pm

New Year :
Date: 24 Oct. 2014, Friday, Kartak Shukla Paksh 1
Best Time : (IST)
06:42 am to 10:59 am
12:24 pm to 01:50 pm
04:41 pm to 06:07 pm

Labh Pancham :
Date: 28 Oct. 2014, Tuesday, Kartak Shukla Paksh 5
Best Time : (IST)
09:34 am to 01:49 pm
03:14 pm to 04:39 pm
07:34 pm to 09:14 pm

Wish you a Happy Diwali

(Muhurats are calculated as per Ahmedabad, India)

25 September, 2014

Cat's Eye - The Gemstone of Ketu


Cat's eye represents the Planet of Ketu. It's also as well known as Lahsunya or Vaidurya. It's protects wearer from hidden enemies, mysterious dangers and diseases. For businessmen, it is a miraculous result giving stone. Bestows wealth by secret means like horse racing, gambling, stock exchange market and speculations. This gemstone destroys long suffering diseases, poverty, and calamites.

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24 September, 2014

Navdurga - Nine Forms of Goddess Durga

Navadurga are the nine forms of Durga collectively worshipped by Shakti devotees. Scriptures differ in naming the nine incarnations. Pictures and paintings of the Nava-Durga also varies from region to region. The most widely accepted account of the nine forms of Durga is the one found in the Devi Mahatmya – Sailaputri, Brahmacharini, Chandraghanta, Kushmanda, Skanda Mata, Katyayani, Kalaratri, Maha Gowri and Siddhidayini.

The nine forms of Durga are worshipped during the nine days of Navratri.

1. Sailaputri – In this form Durga is two-armed and carries a trident and lotus. Her mount is an ox or bull. Sailaputri is believed to be the rebirth of Sati, the daughter of Daksha and the wife of Lord Shiva. In her second birth she is Parvati, the daughter of Himalaya and later she became the consort of Shiva. This is one of the very first forms of Shakti and is closely associated with Lord Shiva. Shailaputri is worshipped on the first day of Navaratri.

2. Brahmacharini – In this form Durga is two-armed and carries a rosary and sacred water pot (Kamandalu). She is in a highly pious and peaceful form or is in meditation. This form of Durga is related to the severe penance undertaken by Sati and Parvati in their respective births to attain Lord Shiva as husband. Some of the most important Vratas observed in different parts of India by women is based on the strict austerities followed by Brahmacharini. She is also known as Tapasyacharini and is worshipped on the second day of Navrathri.

3. Chandraghanta – In this form Durga is 10-armed and rides a tiger. She carries pot, bow, arrow, lotus, discus, rosary, trident, mace and sword. This is a terrible aspect and is roaring in anger. This form of Durga is completely different from earlier forms and shows when provoked she can be the terrible or malevolent. Chandraghanta is worshipped on the third day of Navarathri.

4. Kushmanda – In this form Durga is eight-armed and rides on a tiger. She holds kamandalu, bow, arrow, lotus, pot containing wine, disc, rosary and a club. She is very happy in this form and it is believed that the eternal darkness ended when she smiled. And this led to the beginning of creation. Kushmanda form of Durga is worshipped on fourth day of Navratri.

5. Skanda Mata – In this form Durga is four-armed and rides on a lion. She carries lotus, kamandalu (pot) and bell. Her one hand is in blessing posture. In this form she is the mother of Lord Muruga or Subrahamniya or Kartik, who is also known as Skanda. This the motherly form of Durga and she is benevolent. Skanda Mata form of Durga is worshipped on the fifth day of Navaratri.

6. Katyayani – In this form Durga is four-armed and she carries a sword, shield and lotus. One hand is depicted as giving blessing. She rides a lion. It is believed that in this form she was born as a daughter to Sage Katya of Katya clan. This is the daughter form of Durga. She is epitome of love also won't hesitate to rise up in anger. Katyayani form of Durga is worshipped on the sixth day of Navrathri.

7. Kalaratri – In this form Durga is four-armed and rides a donkey. She carries sword, trident and noose. With one hand she blesses. In this form she is dark and repulsive in appearance. She is cruel and excited. This is the violent and dark side of Durga. This form primarily depicts that life also has dark side. Kalaratri form of Durga is worshipped on seventh day of Navarathri.

8. Maha Gowri – In this form Durga is four-armed and she rides on a bull or a white elephant. She carries a trident and hand-drum. Two hands are in blessing posture. She is pure and is believed to have been in the form of Mata Parvati when she did penance to get Shiva as her husband. Purity is depicted in this form of Durga. Mahagowri form of Durga is worshipped on the eighth day of Navratri.

9. Siddhidayini – In this form Durga is seated on a lotus and is four armed. She holds a lotus, mace, discus and book. In this form Durga removes ignorance and she provides the knowledge to realize That or Brahman. She is surrounded by Siddhas, Gandharvas, Yakshas, Demons and Gods who are worshipping her. The Siddhi that she provides is the realization that only She exists. Siddhidayini form of Durga is worshipped on the ninth day of Navaratri.

16 July, 2014

Book Puja in Shravan Month

Invokes blessings from Lord Shiva for immediate relief from problems and fulfillment of all desires. You can Book Laghurudra Puja for Lord Shiva in this Shravan Month. Our team of brahmins will perform Laghurudra Puja as per vedic rituals on your behalf. Laghurudra Puja is very auspiscious during Shravan month. We highly recommend this Puja for you as it's the ultimate solution for all your problems.

We need the following from you:
1. Date, Time, Place of birth. (This is not compulsory)
2. Gotra, ie, the presiding Rishi of your family. (This is not compulsory)
3. Sankalpa, ie, the specific wish with which you are getting the Pooja performed.
4. Postal Address, Phone/Mobile No., Email Address.
5. Donation (Dakshina)

How long it takes:
After receiving your Puja Request and Donation, Our Qualified Brahmins will do Puja on your behalf. The Puja will be performed on your selected Date in Shravan Month. We guarantee that the Puja you order will be performed as per the genuine Vedic tradition by qualified Pundits on the promised date.

How to send the Puja Request and Donation:
Call us at: +91-9978215600 for more information.

Booking of puja on first come fist serve basis. Book fast, limited puja permitted….!

Om Namah Shivay.

26 April, 2014

Hanuman Aarti with Lyrics



Aarti Keejay Hanuman Lala Ki
Dushta Dalan Raghunath Kala Ki

Jaake Bal Se Girvar Kaanpe
Rog Dosh Jaake Nikat Na Jhaanke
Anjani Putra Maha Baldaai
Santan Ke Prabhu Sada Sahai

De Beeda Raghunath Pathae
Lanka Jaar Siya Sudhi Laaye
Lanka So Koot Samudra Si Khai
Jaat Pavansut Vaar Na Laai

Lanka Jari Asur Saunhaare
Siya Ramji Ke Kaaj Savaare
Lakshman Murchhit Pade Dharni Mein
Laaye Sanjeevan Praan Ubaare

Paithi Pataal Toori Jam Kaare
Ahiravana Ki Bujaa Ukhaare
Baayi Bhujaa Asur Saunhare
Daayi Bhujaa Sab Sant Ubare

Sur Nar Muni Aarti Utaare
Jai Jai Jai Hanuman Uchare
Kanchan Thaar Kapoor Ki Baati
Aarti Karat Anjan Maayee

Jo Hanumanji Ki Aarti Gaave
Basi Baikoontha Param Pad Paave
Lank Vidhans Kiye Raghurai
Tulsidas Swami Keerti Gaayi

24 April, 2014

Natural Emerald - The Gemstone of Mercury


Emerald is ruled by Mercury. Those who have Mercury as lord of an auspicious house in their birth chart may find emeralds beneficial. If Mercury is in an inauspicious house or is aspected by a malefic planet, it may also be advisable to wear emeralds, but its use in this case should be prescribed by a qualified astrologer.

A natural emerald will bring wealth, good health, property, and increase a person’s intelligence. Emeralds help increase memory, which has the effect of also improving the wearer’s education and psychic abilities. Emeralds give energy and balance, calm the mind, give mental peace, and help meditation.

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23 April, 2014

Narendra Modi Horoscope Analysis


Based on the data available on the internet, his horoscope was prepared as follows:
Date of Birth: 17 Sep. 1950
Time of Birth: 11:00 am,
Place of Birth: Vadnagar.

Narendra Modi is born in Vrischik Lagna (Scorpio Ascendant). Mangal with Chandra makes him angry. Shani and Shukra in 10th house made him controversial with some groups. He have Raj Yoga, Gajkesari Yoga and Budhaditya Yoga - which are good for his political carrier. Current transit of Guru will give him Fame and Popularity during Election time. Shani is situated in the place of Surya, which can give a tough time as well as disappointment to his opponents. Surya and Ketu conjunction (Inauspicious Yoga) lead to his downfall and make some controversies before election. Shani transit in Tula - Sade Sati Panoti phase will confuse Modi in taking some big decision after election.

Conclusion: Narendra Modi has very high possibility of becoming the next PM of India. But He may be facing strong challenges and instability in his political career during 2014-15.

13 January, 2014

Donation on Makarsankranti is Auspicious


मकर संक्रांति के पर्व पर दान द्वारा आप ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर कर सकते हैं। अपनी जन्मराशिके अनुसार गरीब व्यक्ति या ब्राह्मिनको निम्नलिखित वस्तुओका अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करे ।
Mesh, Vrischik: मसूर की दाल, लाल कपड़ा, गेहूं, सोना, तांबा की वस्तुएं, लाल चंदन, मूंगा, गुड़ ।
Sinh: गेहूं, स्वर्ण, तांबा, बर्तन, गुड़, लाल वस्त्र, लाल फूल, लाल चंदन  ।
Karka: मोती, चावल, दूध, बांस की टोकरी, कपूर, सफेद कपड़ा, जल, दूध ।
Mithun, Kanya: साबुत मूंग, स्वर्ण, हरा वस्त्र, पन्ना, कस्तूरी ।
Dhan, Meen: मिठाइयां, चीनी, केला, हल्दी, पीला धान्य, पीला कपड़ा, पुखराज, नमक, स्वर्ण, चने की दाल, शहद, केसर, शक्कर ।
Vrishabh, Tula: सफेद रेशमी कपड़ा, चावल, दही, घी, हीरा, इत्र, सेंट, कपूर, शक्कर, मिश्री, चांदी ।
Makar, Kumbh: काली उड़द, तेल, काले वस्त्र, लोहे की वस्तुएं तथा बर्तन, काला तिल, कंबल, नीलम, चांदी ।

12 January, 2014

Makar Sankranti - Spiritual Significance

There are 12 such sankrantis. Transition of the Sun from Sagittarius to Capricorn in the northern hemisphere is known as Makar sakranti (Uttarayan). Capricorn zodiac known as Makar in Hindi, this occasion is named as Makar Sankranti. Indian Calendar is based on lunar positions, Sankranti is a solar event. So while dates of all Hindu festivals keep changing as per the Gregorian calendar, the date of Makar Sankranti remains constant over a long term, 14 January.

In Mahabharat, Bhishm Pithama had a blessing of wish death. Although lying on the bed of arrows, he did not sacrifice his life in the Dakhsinayan, and waited for the Sun to go in Uttarayan. It is believed that on the day of Makar Sankranti, when sun entered in the Uttarayan, Bhishma Pithama, discarded his body. It is believed that person who scarifies his body(dies) in Uttarayan get a position in ‘Krishna Lok’. That person gets liberation, whereas, the one who dies in Dakhshinayan, has to be reborn.

Lord Vishnu has stopped the ever increasing violence of the  demons by killing and burying their heads under a mountain called Mandar Parvat  on this day.

Seeds  of till have a superior capability to attract and emanate Sattva frequencies, eating  or distributing tilgul improves spiritual knowledge on this day. Any donation and meritorious deeds in this period prove more fruitful. Those who take a Holy dip in the rivers Ganga, Yamuna, Godavari and Kaveri at the Holy places situated on the banks of these rivers acquire the highest merit. Makar Sakranti is also celebrated with great enthusiasm as the Kite flying day.

In India it is known by different regional names:

- Makar Sankranti or Sankranti - Andhra Pradesh, Bihar, Goa, Sikkim,Jharkhand, Karnataka, Madhya Pradesh, Maharashtra, Manipur, Orissa, Uttar Pradesh, West Bengal and Uttarakhand.
- Uttarayan- Gujarat and Rajasthan
- Maghi - Haryana, Himachal Pradesh and Punjab
- Pongal - Tamil Nadu
- Magh Bihu or Bhogali Bihu - Assam Valley
- Shishur Saenkraat - Kashmir Valley
- Makara Vilakku Festival - Sabarimala Temple (Kerala)

This  festival gives us a message that we should gradually begin to nurture  transparency and awareness.

04 January, 2014

Arvind Kejriwal - Horoscope analysis


Date of Birth: 16/08/1968,
Time of Birth: 11:46 PM,
Birth Place: Hissar

Vrishabh Lagna indicates deep spiritual nature and self-confident person. Guru in 4th house and Chandra in 1st house - He will get benefits and support from Saints. Best combination of 4 planets Guru, Budh, Surya and Shukra in 4th house. Mangal in 3rd and Shani in 12 house, There is also Budhaditya yoga in 4th house. It's very good for courage, will power and mind stability. also give him political power. He will remain politically active during Guru's Dasha (up to 17th Aug. 2020). But Ketu in 5th house and Rahu in 11th house make him critical decision maker and He will always under pressure from others in Politics.