09 December, 2015

सप्तपदी के सात वचन (Saptapadi)


शास्त्रों के अनुसार कुल 16 संस्कार बताए गए हैं । उनमें से विवाह सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। हिन्दू धर्म में विवाह के समय वर-वधू द्वारा सात वचन लिए जाते हैं। इसके बाद ही विवाह संस्कार पूर्ण होता है।

● पहला वचन ●
तीर्थव्रतोद्यापनयज्ञ दानं
मया सह त्वं यदि कान्तकुर्या:।
वामांगमायामि तदा त्वदीयं
जगाद वाक्यं प्रथमं कुमारी ।।1।।
इस श्लोक के अनुसार कन्या कहती है कि, “स्वामि ! तीर्थ, व्रत, उद्यापन, यज्ञ, दान आदि सभी शुभ कर्म तुम मेरे साथ ही करोगे तभी मैं तुम्हारे वाम अंग में आ सकती हूं, अर्थात् तुम्हारी पत्नी बन सकती हूं। वाम अंग पत्नी का स्थान होता है।

● दूसरा वचन ●
हव्यप्रदानैरमरान् पितृश्चं
कव्यं प्रदानैर्यदि पूजयेथा:।
वामांगमायामि तदा त्वदीयं
जगाद कन्या वचनं द्वितीयम् ।।2।।
इस श्लोक के अनुसार कन्या वर से कहती है कि, “यदि तुम हव्य (यज्ञ के दौरान स्वाहाकार के साथ होम किया हुवा द्रव्य) देकर देवताओं को और कव्य (तर्पण के दौरान स्वधाकार के साथ त्याग किया गया तर्पण) देकर पितृओ की पूजा करोगे तब ही मैं तुम्हारे वाम अंग में आ सकती हूं यानी पत्नी बन सकती हूं।

● तीसरा वचन ●
कुटुम्बरक्षाभरंणं यदि त्वं
कुर्या: पशूनां परिपालनं च।
वामांगमायामि तदा त्वदीयं
जगाद कन्या वचनं तृतीयम् ।।3।।
इस श्लोक के अनुसार कन्या वर से कहती है कि, “यदि तुम मेरी तथा परिवार की रक्षा करो तथा घर के पालतू पशुओं का पालन करो तो मैं तुम्हारे वाम अंग में आ सकती हूं यानी पत्नी बन सकती हूं।

● चौथा वचन ●
आयं व्ययं धान्यधनादिकानां
पृष्टवा निवेशं प्रगृहं निदध्या:।
वामांगमायामि तदा त्वदीयं
जगाद कन्या वचनं चतुर्थकम् ।।4।।
चौथे वचन में कन्या वर से कहती है कि, “यदि तुम धन-धान्य आदि का आय-व्यय मेरी सहमति से करो तो मैं तुम्हारे वाग अंग में आ सकती हूं अर्थात्
पत्नी बन सकती हूं।

● पांचवां वचन ●
देवालयारामतडागकूपं
वापी विदध्या: यदि पूजयेथा:।
वामांगमायामि तदा त्वदीयं
जगाद कन्या वचनं पंचमम् ।।5।।
पांचवे वचन में कन्या वर से कहती है कि, “यदि तुम यथा शक्ति देवालय, बाग, कूआं, तालाब, बावड़ी (वाव) बनवाकर पूजा करोगे तो मैं तुम्हारे वाग अंग में आ सकती हूं अर्थात् पत्नी बन सकती हूं।

● छठा वचन ●
देशान्तरे वा स्वपुरान्तरे वा
यदा विदध्या: क्रयविक्रये त्वम्।
वामांगमायामि तदा त्वदीयं
जगाद कन्या वचनं षष्ठम् ।।6।।
इस श्लोक के अनुसार कन्या वर से कहती है कि, “यदि तुम अपने नगर में या विदेश में या कहीं भी जाकर व्यापार या नौकरी करोगे और घर-परिवार का पालन- पोषण करोगे तो मैं तुम्हारे वाग अंग में आ सकती हूं यानी पत्नी बन सकती हूं।

● सातवां वचन ●
न सेवनीया परिकी यजाया
त्वया भवेभाविनि कामनीश्च।
वामांगमायामि तदा त्वदीयं
जगाद कन्या वचनं सप्तम् ।।7।।
इस श्लोक के अनुसार सातवां और अंतिम वचन यह है कि कन्या वर से कहती है “यदि तुम जीवन में कभी पराई स्त्री को स्पर्श नहीं करोगे तो मैं तुम्हारे वाम अंग में आ सकती हूं यानी पत्नी बन सकती हूं ।

शास्त्रों के अनुसार पत्नी का स्थान पति के वाम अंग की ओर यानी बाएं हाथ की ओर रहता है। विवाह से पूर्व कन्या को पति के सीधे हाथ यानी दाएं हाथ की ओर बिठाया जाता है और विवाह के बाद जब कन्या वर की पत्नी बन जाती है जब वह बाएं हाथ की ओर बिठाया जाता है। इस तरह सात वचन अग्नि, ब्राह्मण और अपने बड़े बुज़ुर्गो की साक्षी में लेकर हिन्दू परंपरा में विवाह संस्कार संपन्न होता है ।

09 October, 2015

Diwali Muhurat - Year 2015


Following Muhurats are calculated as per Ahmedabad, Gujarat, India.

Pushya Nakshtra :
Purchase Account Books, Gold, Silver
Date: 2 Nov. 2015, Monday, Aswin Krishna Paksh 7
04:30 pm to 07:30 pm
Date: 3 Nov. 2015, Tuesday, Aswin Krishna Paksh 8
11:00 am to 01:30 pm
03:10 pm to 04:30 pm

Dhan Teras :
Perform Lakshmi / Kuber / Dhanvantari Pujan
Date: 9 Nov. 2015, Monday, Aswin Krishna Paksh 13
04:32 pm to 05:55 pm
05:55 pm to 07:32 pm

Kaali Chaudas :
Perform Grah Jap, Bhairav and Hanuman Puja
Date: 10 Nov. 2015, Tuesday, Aswin Krishna Paksh 14
11:00 am to 01:45 pm
07:32 pm to 09:05 pm

Diwali (Deepavali) :
Perform Lakshmi / Sharda Pujan / Chopda Pujan
Date: 11 Nov. 2015, Thursday, Aswin Krishna Amavasya
06:51 am to 09:35 am
11:00 am to 12:20 pm
03:10 pm to 05:50 pm
07:31 pm to 10:46 pm (Best Time)

New Year :
Date: 12 Nov. 2015, Thursday, Kartak Shukla Paksh 1
06:52 am to 08:14 am
11:00 am to 03:08 pm
04:31 pm to 09:00 pm

Labh Pancham :
Date: 16 Nov. 2015, Monday, Kartak Shukla Paksh 5
06:54 am to 08:17 am
09:40 am to 11:00 am
01:46 pm to 07:30 pm

Wish you a Happy Diwali.

13 August, 2015

Perform Shiv Puja according to Moonsign











श्रावणमें शिवजीकी विशेष पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं । श्रावणमें हररोज सुबह रुद्राभिषेक या शिवमहिम्न स्तोत्र द्वारा शिवलिंग पर अभिषेक विशिष फलदायी है । विभिन्न राशि के जातक शिवजी के आशिर्वाद प्राप्त करने हेतु और ग्रह दोष निवारण हेतु इस प्रकार पूजा कर सकते है :
(1) मेष राशि : श्रावण में हर मंगलवार शिवलिंग पर लाल फूल अर्पित करे। श्रावण में मंगलवारके दिन गरीब व्यक्ति गुड़, लाल मसूर दाल और गेहूं का दान करे ।
(2) वृषभ राशि : श्रावण में शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाएं। हर शुक्रवार शिवलिंग पर सफ़ेद फूल अर्पित करे। श्रावण में शुक्रवार के दिन गरीब व्यक्ति को अक्षत का दान करे ।
(3) मिथुन राशि : श्रावण में शिवलिंग पर शिवलिंग पर 3 बिल्वपत्र चढ़ाएं। हर बुधवार गाय को हरी घास खिलाएं । बुधवार को किसी किन्नर को दान करें।
(4) कर्क राशि : श्रावण में शिवजी को चंदन एवं चावल चढ़ाएं। हर सोमवार को शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएं । श्रावण में सोमवार को चंद्र से संबंधित वस्तु चावल और सफ़ेद वस्त्र का दान करें।
(5) सिंह राशि : श्रावणमें हर शाम शिवलिंग के पास घी का दीपक जलाएं। रोज सूर्य को जल चढ़ाएं। श्रावण में रविवारको किसी गरीब व्यक्ति को ताम्बेकी वस्तु का दान करे।
(6) कन्या राशि : श्रावणमें नित्य शिवलिंग पर 11 बिल्व पत्र अर्पित करें। हर बुधवार गणेश को दूर्वा चढ़ाएं। नियमित रूप से प्रथम पूज्य गणेशजी की पूजा करने से सभी प्रकार के ग्रह दोषों की शांति हो जाती है।
(7) तुला राशि : श्रावणमें शिवजी को माखन का भोग लगाएं। शुक्रवार को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को वस्त्र का दान करें ।
(8) वृश्चिक राशि : रोज शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें। शिवलिंग पर लाल फूल चढ़ाएं। हर मंगलवार हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाएं। श्रावण में मंगलवारके दिन मसूर की दाल का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को करें।
(9) धनु राशि : श्रावणमें नित्य शिवलिंग पर बिल्व पत्र एवं आंकड़े के फूल चढ़ाएं।शिवलिंग पर पीले फूल चढ़ाएं, प्रसाद में चने की दाल और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
(10) मकर राशि : श्रावण में शिवलिंग पर नित्य तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाएं । शनिवार के दिन किसी गरीब को तेल, काली उड़द और काले कंबल का दान करें।
(11) कुंभ राशि : श्रावण में केसर और दूध को जल में मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं । शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करे । शनिवार के दिन किसी गरीब को तेल और काले कंबल का दान करें।
(12) मीन राशि : श्रावण में रोज शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें और चंदन चढ़ाएं। गुरुवार किसी गरीब को हल्दी का और पीले रंग के अन्न का दान करें ।

07 August, 2015

Vastu Tips for Home


  • The main Door (Entrance) must be little bigger & beautiful than other doors in house. This helps bring prosperity.
  • Keep the Deities idols (Murti) and photos of facing the East or West in the temple at home.
  • Do light a ghee lamp (Deepak) in front of the Deities at your Puja place in Home every day, in morning and evening. After lighting a lamp (Deepak) in puja room, offer Gugal dhoop to every part of your home.
  • Plant Tulsi in the East side at Balcony, Terrace or Courtyard. Light a lamp in front of it in the evening.
  • Place a picture of bright Sunrise on South side wall and Place Family group picture on West side wall in drawing room. Place Furniture, heavy Cabinet etc. in West or South side in drawing room.
  • Don't keep artificial or plastic flowers in Drawing room, Instead decorate your house with real flowers.
  • Study room or Study table should be placed in the East side. Student face should be at East or North while studying.
  • Kitchen should be in the South East corner. Place Gas stove in the South East and drinking water at North East corner.
  • Make sure your bed doesn't face a Mirror, Dressing Table or anything made of glass in Bedroom. The best sleeping direction is head towards the South. This position increase wealth and good for sound sleep.
  • Don't place TV or Computer opposite the bed in Children's room. Door should not be exactly opposite to the bed.
  • Keep the doors of your Toilet and Bathroom closed most the time. Toilet & Bathroom should be separate (not attached).
  • Toilet and Bathroom should be located in Southwest or Northwest corner (direction) in home. Toilet & Bathroom should not be near kitchen and under the stairs. Toilet & Bathroom is major source of negative energy.

27 June, 2015

Navgrah Mantras (Hindi)


Navgraha Stotra (Mantra for Nine Planets): Navagraha Mantra is used to please the planets and influence them positively.

Surya:
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।
तमोSरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोSस्मि दिवाकरम ।।

Chandra:
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम ।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।


Mangal:
धरणी गर्भ संभूतं विद्युत्कान्ति समप्रभम ।
कुमारं शक्ति हस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम ।।


Budh:
प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम ।
सौम्यं सौम्य गुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम ।।


Guru:
देवानां च ऋषीणां च गुरुं का चनसन्निभम ।
बुद्धि भूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पितम ।।


Shukra:
हिम कुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम ।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम ।।


Shani:
नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।


Rahu:
अर्धकायं महावीर्य चन्द्रादित्यविमर्दनम ।
सिंहिकागर्भ संभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम ।।


Ketu:
पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रह मस्तकम ।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम ।।

26 June, 2015

Sri Vishnu Sahasranamam Stotra

'Sahasra' means 'a thousand' and 'Nāma' means 'name'. Vishnu Sahasranam means thousand names of Lord Vishnu. Watch video with animation with voice of Shri S. P. Balasubrahmanyam.




About Purushottam Maas (Adhik Maas)


जिस चंद्रमास में सूर्य का स्पष्ट गति प्रमाणानुसार संक्रमण न हो वह अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) कहलाता है। अधिक मास में उपवास, दान, धर्म, पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्‍ण, श्रीमद्‍भगवतगीता और भगवान विष्‍णु की उपासना की जा‍ती है। पुरुषोत्तम मास में किया गया दान सौ गुना फल देता है। इस माह धार्मिक तीर्थस्थलों पर जाकर स्नान करने से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।

इनमें खास तौर पर सभी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित माने गए है जैसे विवाह, मुंडन, गृह आरंभ, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत या उपनयन संस्कार, देवी-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा, अष्टाकादि श्राद्ध, कुआं, बोरिंग, तालाब का खनन आदि का त्याग करना चाहिए। लेकिन धार्मिक कर्म, व्रत, दान, जप के लिए यह माह पुण्य फलदायी माना गया है। पुरुषोत्तम मास की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की एकादशी महत्वपूर्ण होती है जो इष्ट फलदायिनी, वैभव व कीर्ति में वृद्धि करती है। पुरुषोत्तम मास में एकादशीके दिन उपवास और भगवान विष्णुकी उपासना (विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र) करने से मनोइच्छा पूर्ण होती है।

।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।