27 June, 2015

Navgrah Mantras (Hindi)


Navgraha Stotra (Mantra for Nine Planets): Navagraha Mantra is used to please the planets and influence them positively.

Surya:
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।
तमोSरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोSस्मि दिवाकरम ।।

Chandra:
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम ।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।


Mangal:
धरणी गर्भ संभूतं विद्युत्कान्ति समप्रभम ।
कुमारं शक्ति हस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम ।।


Budh:
प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम ।
सौम्यं सौम्य गुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम ।।


Guru:
देवानां च ऋषीणां च गुरुं का चनसन्निभम ।
बुद्धि भूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पितम ।।


Shukra:
हिम कुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम ।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम ।।


Shani:
नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।


Rahu:
अर्धकायं महावीर्य चन्द्रादित्यविमर्दनम ।
सिंहिकागर्भ संभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम ।।


Ketu:
पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रह मस्तकम ।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम ।।

26 June, 2015

Sri Vishnu Sahasranamam Stotra

'Sahasra' means 'a thousand' and 'Nāma' means 'name'. Vishnu Sahasranam means thousand names of Lord Vishnu. Watch video with animation with voice of Shri S. P. Balasubrahmanyam.




About Purushottam Maas (Adhik Maas)


जिस चंद्रमास में सूर्य का स्पष्ट गति प्रमाणानुसार संक्रमण न हो वह अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) कहलाता है। अधिक मास में उपवास, दान, धर्म, पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्‍ण, श्रीमद्‍भगवतगीता और भगवान विष्‍णु की उपासना की जा‍ती है। पुरुषोत्तम मास में किया गया दान सौ गुना फल देता है। इस माह धार्मिक तीर्थस्थलों पर जाकर स्नान करने से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।

इनमें खास तौर पर सभी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित माने गए है जैसे विवाह, मुंडन, गृह आरंभ, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत या उपनयन संस्कार, देवी-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा, अष्टाकादि श्राद्ध, कुआं, बोरिंग, तालाब का खनन आदि का त्याग करना चाहिए। लेकिन धार्मिक कर्म, व्रत, दान, जप के लिए यह माह पुण्य फलदायी माना गया है। पुरुषोत्तम मास की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की एकादशी महत्वपूर्ण होती है जो इष्ट फलदायिनी, वैभव व कीर्ति में वृद्धि करती है। पुरुषोत्तम मास में एकादशीके दिन उपवास और भगवान विष्णुकी उपासना (विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र) करने से मनोइच्छा पूर्ण होती है।

।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।